पाठ्यक्रम: सामान्य अध्ययन–3 / अर्थव्यवस्था
संदर्भ
- सहकारिता मंत्रालय का 5वाँ स्थापना दिवस 6 जुलाई, 2026 को नई दिल्ली में मनाया गया।
स्थापना दिवस का परिचय
- सहकारी भंडारण अवसंरचना को सुदृढ़ बनाने के लिए 47 अनाज भंडारण गोदामों की आधारशिला रखी गई।
- राष्ट्रीय डेयरी विकास बोर्ड (NDDB) के लिए दूध आपूर्ति समीक्षा डैशबोर्ड पोर्टल (Milk Supply Review Dashboard Portal) का शुभारंभ किया गया, जिससे दूध के संग्रहण और वितरण के प्रबंधन में सुधार होगा।
- राष्ट्रीय शहरी सहकारी वित्त एवं विकास निगम (NUCFDC) की दो प्रमुख पहलों—सहकार सीबीएस (Sahakar CBS) तथा सहकार सहयोगी का शुभारंभ किया गया।
- सहकार सीबीएस (Sahakar CBS) शहरी सहकारी बैंकों के लिए एक केंद्रीकृत कोर बैंकिंग समाधान है।
- सहकार सहयोगी एक संवादी एआई (AI) आधारित मंच है, जिसे ग्राहक सेवाओं तथा बैंकिंग संचालन को बेहतर बनाने के लिए विकसित किया गया है।
सहकारी संस्थाएँ क्या हैं?
- सहकारी संस्था (Co-op) ऐसा संगठन या व्यवसाय है, जिसका स्वामित्व और संचालन समान हित, उद्देश्य या आवश्यकता वाले व्यक्तियों के समूह द्वारा किया जाता है।
- इन व्यक्तियों को सदस्य कहा जाता है। वे सहकारी संस्था की गतिविधियों तथा निर्णय-निर्माण प्रक्रिया में भाग लेते हैं। सामान्यतः “एक सदस्य–एक मत” के सिद्धांत का पालन किया जाता है, चाहे किसी सदस्य ने कितनी भी पूँजी या संसाधन का योगदान दिया हो।
- सहकारी संस्था का मुख्य उद्देश्य बाहरी अंशधारकों (Shareholders) के लिए अधिकतम लाभ कमाने के बजाय अपने सदस्यों की आर्थिक, सामाजिक तथा सांस्कृतिक आवश्यकताओं की पूर्ति करना होता है।
- भारत में विश्व का सबसे बड़ा और सबसे व्यापक जन-आधारित सहकारी पारितंत्र विद्यमान है।
- ये संस्थाएँ जमीनी स्तर पर आर्थिक भागीदारी की रीढ़ हैं तथा किसानों, डेयरी उत्पादकों, मछुआरों, कारीगरों और श्रमिकों को आय के अवसरों से जोड़ती हैं।
संरचनात्मक सुधारों के माध्यम से सहकारी संस्थाओं का सुदृढ़ीकरण
- प्राथमिक कृषि ऋण समितियाँ (PACS) अल्पकालिक सहकारी ऋण संरचना की आधारभूत इकाइयाँ हैं। ये बहु-सेवा संस्थाओं के रूप में सक्रिय हैं और ग्रामीण आर्थिक सेवाओं के प्रथम संपर्क बिंदु का कार्य करती हैं।
- श्वेत क्रांति 2.0 : सहकारी डेयरी क्षेत्र को सुदृढ़ करने के लिए 2028–29 तक दूध के संग्रहण में 50% वृद्धि का लक्ष्य रखा गया है।
- अब तक 25,282 डेयरी सहकारी समितियों का पंजीकरण किया जा चुका है, जिनमें महिला-नेतृत्व वाली डेयरी सहकारी समितियों तथा सहकारी नेटवर्क के व्यापक विस्तार पर विशेष बल दिया गया है।
- सहकारी शिक्षा: त्रिभुवन सहकारी विश्वविद्यालय (TSU) की स्थापना भारत के प्रथम सहकारी विश्वविद्यालय के रूप में की गई है। यह विश्वविद्यालय सहकारी क्षेत्र में शिक्षा, अनुसंधान तथा कौशल विकास को प्रोत्साहित करता है।
- राष्ट्रीय सहकारी प्रशिक्षण परिषद (NCCT) तथा राष्ट्रीय कृषि और ग्रामीण विकास बैंक (NABARD) के माध्यम से प्रशिक्षण कार्यक्रम संचालित किए जाते हैं।
- भारत टैक्सी : यह सहकार टैक्सी कोऑपरेटिव लिमिटेड की एक पहल है, जो सहकारी मॉडल पर आधारित चालक-केंद्रित परिवहन मंच है।
- इसका उद्देश्य चालकों को आर्थिक रूप से सशक्त बनाना तथा आम जनता को सस्ती, सुरक्षित और विश्वसनीय परिवहन सेवाएँ उपलब्ध कराना है।

भारत में सहकारी संस्थाओं की सफलता की कहानियाँ
- अमूल (गुजरात): डेयरी सहकारी संस्था अमूल भारत की सबसे सफल सहकारी संस्थाओं में से एक है। इसने लाखों छोटे किसानों को सशक्त बनाकर डेयरी क्षेत्र में क्रांतिकारी परिवर्तन किया तथा भारत को वैश्विक डेयरी बाज़ार में अग्रणी देशों में स्थापित किया।
- इफको (IFFCO): यह विश्व की सबसे बड़ी उर्वरक सहकारी संस्थाओं में से एक है। इफको लाखों किसानों को उर्वरक, कृषि आदान, फसल परामर्श सेवाएँ तथा डिजिटल समाधान उपलब्ध कराती है।
- स्व-नियोजित महिला संघ (SEWA): इस संगठन ने डेयरी, हस्तशिल्प, कृषि तथा वित्तीय सेवाओं जैसे क्षेत्रों में महिला-नेतृत्व वाली सहकारी संस्थाओं को बढ़ावा दिया है।
- महाराष्ट्र का सहकारी चीनी क्षेत्र: प्रवरा सहकारी चीनी कारखाना (भारत का प्रथम सहकारी चीनी कारखाना) तथा वारणा सहकारी परिसर (Warana Cooperative Complex)जैसी संस्थाओं के नेतृत्व में इस क्षेत्र ने चीनी उत्पादन को शिक्षा, बैंकिंग, डेयरी, स्वास्थ्य सेवाओं तथा कृषि-प्रसंस्करण से जोड़कर ग्रामीण अर्थव्यवस्था में व्यापक परिवर्तन किया है।
सहकारी संस्थाओं के समक्ष चुनौतियाँ
- सहकारी संस्थाओं के कार्यों में राजनीतिक हस्तक्षेप।
- कमज़ोर शासन व्यवस्था तथा पेशेवर प्रबंधन का अभाव।
- सीमित वित्तीय संसाधन तथा सहकारी संस्थाओं का कम पूँजी आधार।
- विभिन्न राज्यों में सहकारी आंदोलन का असमान विकास।
- सदस्यों में सहकारी शासन व्यवस्था तथा उनके अधिकारों के प्रति सीमित जागरूकता।
97वाँ संविधान (संशोधन) अधिनियम, 2011
- इसने सहकारी समितियों के गठन के अधिकार को मौलिक अधिकार के रूप में मान्यता दी तथा इसे अनुच्छेद 19 के अंतर्गत स्थान दिया।
- इसने राज्य के नीति-निदेशक तत्वों में सहकारी समितियों के संवर्धन से संबंधित एक नया प्रावधान अनुच्छेद 43-ख (43B) के रूप में जोड़ा।
- भाग IX-ख (Part IX-B) – आंशिक रूप से निरस्त: इस संशोधन द्वारा संविधान में “सहकारी समितियाँ” शीर्षक से भाग IX-ख (अनुच्छेद 243-झक (243ZH) से 243-झट (243ZT)) जोड़ा गया।
- वर्ष 2021 में भारत का सर्वोच्च न्यायालय ने भारत संघ बनाम राजेंद्र एन. शाह वाद में भाग IX-ख के एक महत्त्वपूर्ण हिस्से को असंवैधानिक घोषित करते हुए निरस्त कर दिया।
स्रोत: PIB
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